पर्वतराज हिमालय
बर्फ की चादर है जिसके ऊपर कितनी मोटी चढाई है जिसकी अर्जुन के तीर जितनी सीधी महीनो लग जाते है जिसे चढ़ने में वही है पर्वतो का राजा पर्वतराज हिमालया इर्द गिर्द मंडराती है जिसके बादलों की घटाए ऐसा यह हमारा प्यारा हिमालय निकलती है जिससे गंगा , यमुना , सरस्वती जैसी कई पवित्र नदियों की धाराए नाजाने हिमालय अपनी सलिलाओं से बुझाता है हर दिन कितने लोगों की प्यास शिवजी भी करते है जिस पर निवास ……………………………… वही है मेरा प्यारा हिमालय खास डिजिटल पत्रिका के लिए नाम : पुण्य सिंह